बेहतरीन बीवी और बेहतरीन शौहर की पहचान

behtareen biwi aur shohar ki pehchan in hindi

बेहतरीन बीवी की पहचान

✓ जो अपने शौहर की फरमाबरदारी और ख़िदमत गुज़ारी को अपना फ़र्ज़-ऐ-अज़ीम समझे।

✓ जो अपने शौहर के तमाम हुक़ूक़ अदा करने में कोताही न करें।

✓ जो अपने शौहर की खूबियों पर नज़र रखे और उसके ऐब और खांमियों को नज़र-अंदाज़ करती रहे।

✓ जो खुद तकलीफ उठा कर अपनों शौहर को आराम पहुंचाने की हमेशा कोशिश करते रहे।

✓ जो अपने शौहर से उसकी आमदनी से ज़्यादा का मुतालबा न करे और जो मिल जाये उसपर सब्र और शुक्र के साथ ज़िन्दगी बसर करे।

✓ जो अपने शौहर के सिवा किसी अजनबी मर्द पर निगाह न डाले न किसी की निगाह अपने ऊपर पड़ने दे।

✓ जो परदे में रहे और अपने शौहर की इज़्ज़त ओ नमूस की हिफाज़त करे।

✓ जो शौहर के माल और मकान ओ सामान और खुद अपनी जात को शोहर की अमानत समझ कर हर चीज़ की हिफाज़त ओ निगेहबानी करती रहे।

✓ जो अपने शौहर की मुसीबत में अपनी जानी और माली क़ुरबानी के साथ वफादारी का सबूत दे।

✓ जो परहेज़गारी की पाबन्द और दीनदार हो, हुक़ूक़ अल्लाह और हुक़ूक़ उल इबाद को अदा करती हो।

✓ जो पड़ोसियों(औरतो) और मिलने जुलने वाली औरतों यानि सास, ननन्द, ससुराली रिश्तेदार के साथ खुश अख़लाक़ी और शराफ़त का बर्ताव करे।

✓ जो मायका और ससुराल दोनों घरों में हर दिल अज़ीज़ और बा इज़्ज़त हो।

बेहतरीन शौहर की पहचान

✓ जो अपनी बीवी के साथ नरमी, खुश अखलाखी और हुस्ने सुलूक के साथ पेश आये।

✓ जो अपनी बीवी के हुक़ूक़ अदा करने में किसी किस्म की ग़फ़लत और कोताही न करे।

✓ जो अपनी बीवी का इस तरह हो कर रहे के किसी अजनबी औरत पर निगाह न डाले।

✓ जो अपनी बीवी को अपने ऐश-ओ-इशरत में बराबर समझे।

✓ जो अपनी बीवी पर कभी ज़ुल्म और किसी किस्म की भी ज्यादती न करे।

✓ जो अपनी बीवी की तंग मिज़ाजी और बद अख़लाक़ी पर सब्र करे।

✓ जो अपनी बीवी की खूबियों पर नज़र रखे और मामूली गलतियों को नज़र अंदाज़ करे।

✓ जो अपनी बीवी की मुसीबतों, बिमारियों और रंज और गम में दिलजोई और वफादारी का सबूत दे।

✓ जो अपनी बीवी को परदे में रख कर इज़्ज़त और आबरू की हिफाज़त करे।

✓ जो अपनी बीवी को जिल्लत और रुसवाई से बचाए रखे।

✓ जो अपनी बीवी को दीनदारी की ताकीद करता रहे और शरीअत की राह पर चलायें।

✓ जो अपनी बीवी के अखराजात(खर्चे) में बख़ीली और कंजूसी न करे।

✓ जो अपनी बीवी को इस तरह ताबेय (कण्ट्रोल में) रखे के वो किसी बुराई की तरफ़ रूख़ भी न कर सके।

इंशा अल्लाह उल अजीज ! अल्लाह तआला हमे कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफीक दे।

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