क़यामत क्यां, क्यों और कब | मैदाने हश्र (पार्ट: १)

क़यामत क्यां, क्यों और कब | मैदाने हश्र (पार्ट: १) | Qayamat kya kyun aur kab

क़यामत क्यां, क्यों और कब | मैदाने हश्र (पार्ट: १)

{tocify} $title={Table of Contents} 

۞ बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम ۞

क़यामत क्या है ?

इस दुनिया में जो भी आया, हर एक ने इसको छोड़कर दूसरी दुनिया का रास्ता लिया यानि अपनी उम्र की सांस पूरी करके मौत की कठिन घाटी को तय करके बरजख में पहुंचा। बरजख में अज़ाब और तकलीफें भी हैं और आराम व राहत भी है। अपने-अपने आमाल के एतबार से बरजख में अलग-अलग हालात से गुजरना पड़ता है। दुनिया से जो आता है बरजख में जगह पाता है। 

गरज़ यह कि हर आने वाला जाएगा और जिस तरह इंसानों और जिन्नों की उम्रें तय हैं; उसी तरह दुनिया की उम्र भी तयशुदा है। जब इस दुनिया की उम्र पूरी होगी; अचानक उसके मजमुए को मौत आ जाएगी। एक-एक आदमी के चले जाने को मौत और पूरी दुनिया के ख़त्म हो जाने को कयामत कहते हैं

क़यामत क्यों आएगी ?

अल्लाह तआला ने ज़िन्दगी और मौत को इसीलिए पैदा किया ताकि वो आज़माये के अमल के लिहाज से कौन अच्छे और कौन बुरे होंगे , और जो जैसा करेगा वैसा उसको बदला दे दिया जायेगा। 

इंसान क्या करे और क्या ना करे जिसका एलान भी अल्लाह ने अपने पैग॒म्बरों की ज़ुबानी साफ कर दिया की “इंसानों! तुमको मरना है और मरने के बाद जी उठना है और जी उठकर पैदा करने वाले मालिक के सामने जवाबदही करना है।” इसीलिए क़यामत आएगी।

कुरआन मजीद में कियामत के दिन को ‘“यौमुद्दीन‘ (बदले का दिन) और यौमुल फसल” (फैसले का दिन) और ‘यौमुल हिसाब” (हिसाब का दिन) फ़रमाया गया है।

हिसाब के लिए क़यामत ही क्यों, दुनिया में फैसले क्यों नहीं होते ?

अब यह सवाल आता है कि “इस दुनिया में क्यों फैसले नहीं होते और बदले क्‍यों नहीं मिलते? तो इसका जवाब यह है कि एक तो यह दुनिया अमल की जगह है इसमें इम्तिहान के लिए आते हैं। 

अमल की जगह अमल का बदला मिलने लगे तो गैब पर ईमान न रहे और इम्तिहान का मकसद बेकार हो जाए। फिर यह कि अमल बराबर जारी है। नेकियों से बहुत-से गुनाह (छोटे) माफ होते रहते हैं और तौबा करने का भी मौका है।

इसलिए यह मुनासिब और सही है कि इस जिंदगी के बाद दूसरी ज़िंदगी में फैसले हों और बदले दिए जाएं। कियामत के दिन जब ख़त्म होगा और सबके फैसले हो जाएंगे तो हर एक अपने-अपने अंजाम के मुताबिक दोजख़ में पहुंचेगा। 

वे गुनाहगार मोमिन जो बुरे आमाल की वजह से दोजख़ में जाएंगे। बाद में जब अल्लाह जल्ल ल शानुहू की मंशा होगी, दोज़ख़ से निकाल कर जन्नत में दाख़िल कर दिए जाएंगे। लेकिन जन्नत से निकाल कर किसी को किसी दूसरी जगह न भेजा जाएगा। कियामत के फैसले के बाद जन्नत का फैसला हो जाना ही सच्ची कामयाबी है।

क़यामत कब आएगी ?

कियामत का आना हक है इसमें कोई शक नहीं। लेकिन ये कब आएगी इसके बारे में हकीकी इल्म तो अल्लाह तआला को ही है , अल्लाह तआला की जब मंशा होगी; सूर फूंक दिया जाएगा | कियामत आ मौजूद होगी । तो कोई भी उसको झुठलाने वाला न होगा | उसके आने का वक्त अल्लाह तआला के इल्म में मुक्रर है। लोगों के एतराज करने से अल्लाह तआला इसे वक्त से पहले जाहिर न फरमाएगा। सूरः सबा में यह भी इर्शाद है:

“और वे कहते हैं कि यह वादा कब पूरा होगा अगर तुम सच्चे हो। आप (नबी ﷺ) कह दीजिए कि ‘ए लोगो! तुम्हारे लिए वादा है एक दिन का। न एक घड़ी इससे आगे किये जाओगे और न पहले।'”

बहरहाल इस सिरिज (मैदाने हश्र के हालत) में हम जायज़ा लेंगे के ‘क़यामत के दिन के हालत कैसे होंगे, क़यामत की हौलनाकिया क्या होंगी? और कौन लोग रेहमते इलाही के साये में होंगे।” इंशाअल्लाह इस सीरीज में हम तफ्सील में इसका जिक्र करेंगे। बराये मेहरबानी इन पोस्ट का तरतीब से पढ़े और इन्हे ज्यादा से ज्यादा शेयर करने में हमारा तावूंन करे।

सबसे बड़े ज़ालिमों पर क़यामत नाज़िल होगी

हजरत अब्दुल्लाह बिन मस्ऊद (र.अ.) से रिवायत है कि हज़रत रसूले करीम (ﷺ) ने इर्शाद फ़रमाया कि:

“कयामत सबसे बुरी मख़्लूक पर कायम होगी।” यह भी इर्शाद फरमाया कि ‘उस वक्त तक कयामत कायम न होगी जब तक जमीन में अल्लाह-अल्लाह किया जाता रहेगा।’ यह भी इरशाद फरमाया कि ‘कयामत किसी ऐसे शख्स पर कायम न होगी जो अल्लाह-अल्लाह कहता होगा।” [मुस्लिम शरीफ]

एक लम्बी हदीस में है कि :

(चूंकि किसी मुसलमान की मौजूदगी में कयामत कायम न होगी। इसलिए दुनिया के इसी दिन व रात के होते हुए) अचानक अल्लाह तआला एक उम्दा हवा भेज देगा जो मुसलमानों की बगलो में लगकर हर मोमिन और मुस्लिम की रूह कब्ज़ कर लेगी और सबसे बुरे लोग बाकी रह जाएंगे जो (सबके सामने बेहयाई से) गधों की तरह औरतों से ज़िना करेंगे। [मिश्कात शरीफ]

ठंडी हवा के जरिए तमाम मोमिनो को मौत दी जाएगी

हजरत अब्दुल्लाह बिन उमर (र.अ.) से रिवायत है कि प्यारे नबी (ﷺ) ने इरशाद फरमाया कि :

दज्जाल को कत्ल करने के बाद हजरत ईसा (अलैहि सलाम) सात साल लोगों में रहेंगे। इस दौर में दो आदमियों के बीच ज़रा दुश्मनी न होगी। फिर अल्लाह तआला मुल्क शाम (आजका सीरिया) की तरफ से एक ठंढी हवा भेज देगा, जिसकी वजह से तमाम मोमिन ख़त्म हो जाएंगे (और) जमीन पर कोई भी ऐसा शख्स बाकी न रहेगा, जिसके दिल में ख़ैर का (या फरमाया ईमान का) कोई जर्रा होगा। यहां तक कि अगर तुम (मुललमानों में से) कोई शख्स किसी पहाड़ के अन्दर (खोह में) दाख़िल हो जाएगा, तो वह हवा वहां भी दाखिल होकर उसकी रूह कब्ज़ कर लेगी।

इसके बाद सबसे बुरे लोग रह जाएंगे (जो बुरे करतूतों और शरारत की तरफ बढ़ने में) हल्के परिंदों की तरह (तेजी से उड़ने वाले) होंगे और (दूसरों का ख़ून बहाने और जान लेने में) दरिंदों-जैसे अखलाख वाले होंगे। न भलाई को पहचानते होंगे, न बुराई को बुराई समझते होंगे। 

उनका यह हाल देखकर इंसानी शक्लों में शैतान उनके पास आकर कहेगा कि (अफसोस! तुम कैसे हो गये) तुम्हें शर्म नहीं आती (कि अपने बाप-दादों को छोड़ बैठे)। वे उससे कहेंगे कि तू ही बता हम क्या करें? इसलिए वे उनको बुत परस्ती की तालीम देगा (और वे बुत की पूजा करने लगेंगे) वे इसी हाल में होंगे (यानी क़त्ल व ख़ून, बिगाड़-फसाद और बुत परस्ती में पड़े होंगे) और उनको ख़ूब रोजी मिल रही होगी और अच्छी जिंदगी गुज़र रही होगी कि सूर(Trumpet) फूंक दिया जाएगा। 

सूर की आवाज सब ही सुनेंगे। जो-जो सुनता जाएगा (डर की वजह से, हैरान होकर) एक तरफ को गरदन झुका देगा और दूसरी तरफ को उठा देगा।

हज़ार में 999 दोजखी होंगे

फिर फरमाया कि सबसे पहले जो शख़्स उसकी आवाज़ सुनेगा, वह वह होगा जो ऊटों को पानी पिलाने का हौज़ लीप रहा होगा। 

वह शख्स सूर (Trumpet) की आवाज सुनकर बेहोश हो जाएगा और फिर सब लोग बेहोश हो जाएंगे। 

फिर अल्लाह एक बारिश भेजेगा जो ओस की तरह होगी, उससे आदमी उग जाएंगे (यानी कब्रों में मिट्टी के जिस्म बन जाएंगे)। फिर दोबारा सूर फूंका जाएगा तो अचानक सब खड़े देखते होंगे। 

इसके बाद एलान होगा कि ऐ लोगो! चलो अपने रब की तरफ और फ़रिश्तो को हुक्म होगा कि इनको ठहराओ। इनसे सवाल होगा। फिर एलान होगा कि (इस सारे मज्मे से) दोजख्रियों को अलग कर दो। इसपर पूछा जाएगा (अल्लाह जल्ल ल शानुहू से) कि किस तादाद में से कितने दोजख़ी निकाले जाएं, जवाब मिलेगा कि हर हज़ार में 999 दोजखी (जहन्नुमी) निकालो|

इसके बाद आंहजरत सैयदे आलम (ﷺ) ने फरमाया कि: 

“यह दिन होगा कि जिसके डर और दहशत से, बच्चे बूढ़े हो जाएंगे और यह दिन बड़ा ही मुसीबत का होगा।” [मुस्लिम शरीफ]

इन हदीसों से मालूम हुआ कि कयामत कायम होने के वक्त कोई मुसलमान दुनिया में मौजूद न होगा। इस बड़ी मुसीबत से अल्लाह तआला इन इंसानों को बचाये रखेंगे, जिनके दिल में जर्रा बराबर भी ईमान होगा।

To be Continued …


एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने

Trending Topic