इस्लाम में औरतो के हुकुक इज्जत और महत्व Part-10
इस्लाम में औरतो के हुकुक इज्जत और महत्व Part-10

अब मैं आपसे वृंदावन की बात करूंगी। वृंदावन में सैकड़ों विधवाएं(बेवा औरते) हैं जिन्हें उनके बेटे या परिवार वाले कृष्ण दर्शन के नाम पर छोड़ गए और फिर लौटकर कभी उनका हाल पूछने नहीं आए।

आज से 25-30 साल पहले की बात है। तब मैं महिला आयोग की अध्यक्ष थी। मैं वृंदावन की विधवाओं का हाल जानने के लिए पहुंची। मैंने सड़क पर एक विधवा का शव(लाश)देखा। उस शव को चील-कौवे नोंच रहे थे। ये देखकर मेरा कलेजा दहल गया।

मैंने लोगों से कहा कि वे उसका अंतिम संस्कार करें। उन्होंने कहा कि वे विधवा का शव नहीं छू सकते, यह अपशकुन(बुरा)होगा। ऐसी ही तमाम भ्रांतिया(गलतफहमियां ) और परंपराएं हैं, जिनके नाम पर विधवाओं का शोषण होता रहा है। लेकिन मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "मेरी उम्मत के 70,000 लोग बिना हिसाब के जन्नत मे रहेगे, वह लोग होगे जो झाड़-फूंक(रुकिया ) नहीं कराते होंगे, और न शकुन अपशकून पर यकीन करते होंगे और अपने रब पर यकिन करते होंगे।
(सहिह बुखारी, खंड 7, 6472)

दर्दनाक कुप्रथा - देश में कुछ ऐसे इलाके भी हैं, जहां विधवाओं को अपशकुनी(बुरा) या चुड़ैल मान लिया जाता है। उत्तर व मध्य भारत और नेपाल के कुछ ग्रामीण इलाकों में ऐसी घटनाएं सुनने में आई हैं। ऐसे मामलों में स्थानीय पंचायतें भी कुछ नहीं कर पाती है।
विधवाओं की खराब स्थिति के लिए अशिक्षा(अनपढ़,कम पड़े लिखे होना)एक बड़ी वजह है। विधवाओं को भी सम्मान से जीने और खुश रहने का हक है।

अब इस्लाम में देखा जाए इन सब को बहुत गुनाह कहा गया है और ऐसे हरकतें करने वालो को सजा बताई है और अल्लाह के दूत (नबी) सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तरीके बताये विधवा औरतो के साथ सुलुक और बेहतर पेश आने का और जीने का तरीका बयान किया - अल्हम्दुलिल्लाह
To be continued ...
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