इस्लाम में औरतो के हक,सम्मान और इज्जत Part-11
इस्लाम में औरतो के हक,सम्मान और इज्जत Part-11


हाल ही में एक विवादित बयान दिया था जिसमे कहा था कि महिलाओं को नौकरी नहीं करनी चाहिए. औरत सिर्फ एक सुरत में नौकरी कर सकती हैं कि अगर घर में मर्द ना हो तो. और नाैकरी करनी भी पड़े तो चेहरा और पूरा शरीर ढंक कर

जबकि हकीकत यह है कि खुद पैगंबर की बीवी का बहुत बड़ा बिजनेस था, और तो और महिलाएं जंग तक में जाती थीं। अगर आप इस्लाम के पवित्र ग्रन्थ(पाक किताब) कुरआन को पढ़ते हैं तो पाएंगे कि इस्लाम में महिलाओं के काम करने और प्रोग्रेसिव(आगे बढ़ने ) सोच रखने पर कहीं पाबंदी नहीं है।

पैगम्बर हजरत मोहम्मद की बीवी खदीजा रदियल्लाह अन्हा के पिता उस समय मक्का के बड़े कारोबारी(बिजनेस मैन) थे। उनकी मौत के बाद खदीजा ने ही अपने पिता का पूरा बिजनेस संभाला. उस वक्त वे सीरिया से लेकर यमन तक कारोबार किया करती थीं।

उनका बिजनेस इतना बड़ा था, जितना कुरैश ट्राइब (कुरैशी कबीले) के सभी कारोबारियों का मिलाकर नहीं था।
हजरत आयशा रदियल्लाह अन्ह ने भी जमल की जंग मे मुखिया रही, हजरत उम्मे सलामा इस्लामिक स्कॉलर रही हैं
हजरत जैनब सोशल वर्कर थीं।

हजरत आयशा की हदीस है कि महिलाएं अपनी जरूरत के लिए घर से बाहर निकल सकती हैं।

सूरा 33 आयत 35 में कहा गया है कि "पुरुष और महिला बराबर हैं।श्रेष्ठ वही है जो अल्लाह के बताए रास्ते पर है और सही है।"

और इस्लाम आपको बराबर हक देता है इस्लाम यह नहीं कहता कि मर्द को इतना सवाब मिलेगा और औरत को इतना आइए कुरान में देखते हैं क्या कहा अल्लाह ने।

"और जो शख्स अच्छे अच्छे काम करेगा (ख्वाह) मर्द हो या औरत और ईमानदार (भी) हो तो ऐसे लोग बेहिश्त में (बेखटके) जा पहुंचेंगे और उनपर तिल भी ज़ुल्म न किया जाएगा।" (कुरआन 4:124)
इसलिये महिलाओ को इस्लामिक शरीयत के अंदर कोई मनाही नही है और कर सकती हे ,लेकिन हमारी इस्लाम के कम इल्म लोगो ने और बाज दुश्मन ,गैर मुस्लिम ताकते मीडिया ने आज इस्लाम को गलत बताया और गलत शरियत पेश कर दी जबकि असल में कुछ और है जो औरतो के हक में आगे इंशा अल्लाह अगले पार्ट में समझायेगे 

To be continued ...

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