अपनी बच्चियों को फ़र्ज़ी मुहब्बत से बचाये ...

अपनी बच्चियों को फ़र्ज़ी मुहब्बत से बचाये ...


फ़र्ज़ी मुहब्बत

अपने घर कि बहनो की अपनी बच्चियों की हिफाज़त करो उन्हे दुनिया की रंगीनियों के ख्वाब देखने से बचाओ:-

दौरे हाज़िर की फ़र्ज़ी मुहब्बत गुनाहों का मजमुआ है इस दौर की झूठी मुहब्बत जिना है व जहन्नुम का बाइस है इसमें जिल्लत और रुसवाई के सिबा कुछ नहीं, हक़ीक़ी मुहब्बत निक़ाह के बाद अपनी जोजा वीबी से करें। 

एक हदीस का मफहूम है रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया :-
"मर्दो औरत के दरमियान जो निकाह के ज़रिये मुहब्बत पैदा होती है ऐसी कोई मुहब्बत देखने में नहीं आती।" यानी जो बाहमी मुहब्बत व उलफत निकाह से पैदा होती है उसकी कोई नज़ीर नहीं मिलती

ऐ मेरी प्यारी बहन!... 

जीते जागते ख्वाब देखना बेवकुफी है और उन ख्वाबों के सहारे जिंदगी बसर करने की कोशिश करना उस से बड़ी बेवकूफी है, जिंदगी गुज़ारने के लिए अपनी हकीकत को सामने रखना पडता है, आप की हकीकत आप का वो घर है जहां आप के मां बाप और भाई बहन हैं, आप की हकीकत आप का वो खानदान है जो आप का मजबूत सहारा है, 

आप की हकीकत आप का वो समाज है जहां आप की इज़्ज़त है, आप का हकीकी शहज़ादा आप का वो शोहर-पति है जिस को आप के वालिदैन (गार्जियन) आप के लिए चुनेंगे, फिर आप अपनी इन हकीकतों से मुंह मोड कर आखें बंद करके कहां अपने ख्वाबों के शाहज़ादे के पिछे बेइज़्ज़त होने को तैय्यार हो गई हैं...? 

याद रखिए कि जागते हुए देखे गए ख्वाबों के रास्ते बडे ख़तरनाक होते है ,इन रास्तों में आप को कदम कदम पर ठोकर ,बात बात पर बेइज्जती और लम्हा लम्हा मौत के सिवा कुछ हासिल नही होगा..?

जो अंजानी खुशीयों को हासिल करने के लिए अंजान राहों पर एक अंजान आदमी के साथ निकल पडी थी, फिर जब पुरी तरह से जी भर जाने के बाद उस अंजान मर्द ने बीच रास्ते मे उस लडकी को छोडा तो उस लडकी के हिस्से मे दर्द, तकलीफ और आंसू के सिवा और कुछ नहीं आया और उस दर्द को सह लेने के मुकाबले में मौत को गले लगा लेना उसे आसान लगा..!

इस लिए अल्लाह के वास्ते ऐसी झूटी मोहब्बत का शिकार मत बनिए और ऐसी बेवकूफी मत कीजिए.. चार दिन की खुशियों के बदले जिंदगी भर के गम मत खरीदे...

बेटियाँ किसी भी घर कि हो
मगर वो ईज्जत सभी के घरों कि होती है...

• अल्लाह हम तमाम को ऐसी जिल्लत व रुस्वाई से बचाये,.
• जबतक हमे जिन्दा रखे, इस्लाम और पर जिन्दा रखे। ..
• खात्मा हमारा इमां पर हो,
• वा आखीरु दावाना अलहम्दुलिल्लाही रब्बिल आलमीन ! अमीन...

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