14. रमजान | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

14. रमजान | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

14. Ramzan | Sirf Paanch Minute ka Madarsa

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1. इस्लामी तारीख

सब से पहले ईमान लाने वाले

“नुबुव्वत मिल जाने के बाद रसूलुल्लाह (ﷺ) ने तबलीग शुरु कर दी, चूंकि अरब में सदियों से कुफ्र व शिर्क की वबा फैली हुई थी और हर शख्स उस में मुब्तला था इसलिए खुल्लम-खुल्ला पैगामे हक एक मुश्किल काम था। लिहाज़ा हज़ूर ने पोशीदा तौर से लोगों को इस्लाम की दावत दी।

औरतों में सबसे पहले आप की हमदर्द और ग़म गुसार जौज-ए-मोहतरमा हज़रत खदीजा ने इस्लाम कबूल किया। मर्दो में आप के बचपन के दोस्त, तिजारत के साथी हज़रत अबू बक्र सिद्दीक (र.अ)  सुनते ही (आमन्नाव सद्दकना) बोल उठे और ईमान ले आए 

लड़कों में आपके चचा अबू तालिब के बेटे हज़रत अली (र.अ)  ईमान की दौलत से मालामाल हुए।

खादिमों में आपके चहिते खादिम हज़रत जैद बिन हारिसा (र.अ)  ने इस्लाम कबूल किया यह चारो हज़रात पहले ही दिन मुसलमान हो गए, इन हज़रात का ईमान लाना जो हुज़ूर की नुबुव्वत से पहले की जिंदगी से बखूबी वाकिफ थे आप के सच्चे नबी होने की रौशन दलील है।”

2. हुजूर (ﷺ) का मुअजीजा

खजूर के गुच्छे का चलना

एक देहाती रसूलुल्लाह (ﷺ) की खिदमत में आया और कहा कि मुझे यह कैसे यकीन आए के आप नबी हैं? 

आप (ﷺ) ने फर्माया :

अगर मैं उस खजूर के खोशे (गुच्छे) को बुला लूं तो तुम मेरे नबी होने को मान लोगे? 

उसने कहा : हां! आप (ﷺ) ने उस गुच्छे को बुलाया, वह दरख्त से उतर कर रसूलुल्लाह (ﷺ) के पास आया और फिर आप (ﷺ) के हुक्म से वापस चला गया, देहाती फौरन इस मुअजिज़े को देख कर ईमान ले आया।

📕 तिर्मिज़ी : ३६२८, अन इब्ने अब्बास (र.अ) 

3. एक फर्ज के बारे में

सुबह की नमाज़ अदा करने पर हिफाज़त का जिम्मा 

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

“जिस ने सुबह की नमाज़ अदा की, वह अल्लाह की हिफाज़त में है।”

📕 मुस्लिम: १४१३, अन मुंदुव (र.अ) 

4. एक सुन्नत के बारे में

कर्ज़ की अदायगी की दुआ

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने हज़रत अली (र.अ)  को यह दुआ कर्ज़ की अदायगी के लिए सिखाई:

اللهم اكفني بحلالك عن حرامك واني بفضلك عمن سواك

तर्जमा : ऐ अल्लाह ! मुझे अपना हलाल रिज्क अता कर के हराम से मेरी हिफाज़त फर्मा और मुझे अपने फज़ल से अपने सिवा सब से बेनियाज कर दे।

📕 तिर्मिज़ी : ३५६१

5. एक अहेम अमल की फजीलत

खजांची का बखुशी सदका देना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया:

“अमानतदार खजांची दो सदका करने वालों में से एक है, जब के उसे सदका देने का हुक्म दिया गया हो और वह खुश दिली से पूरा-पूरा सदका उस शख्स को दे दे, जिसको देने का हुक्म मिला है।”

📕 अबू दाऊद :१६८४,अन अबी मूसा (र.अ) 

वजाहत: दो सदका करने वालों से मुराद एक खजांची, दूसरा मालिक है, जिस ने सदका करने का हुक्म दिया है, अगर खजांची अमानतदारी के साथ मालिक के हुक्म के मुताबिक खुश दिली से सदका करे, तो हुज़ूर ने उसे भी सदका करने वालों में शुमार फर्माया है।

6. एक गुनाह के बारे में

ज़कात न देने का अंजाम

“कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है :

“जो लोग सोना या चाँदी जमा कर के रखते हैं और उस को अल्लाह तआला के रास्ते में खर्च नहीं करते (ज़कात अदा नहीं करते), आप उन को दर्दनाक अज़ाब की खबर सुना दीजिए के जिस दिन उस सोने चांदी को आग में तपाया जाएगा, फिर उस से उन की पेशानियों और उन के पहलुओं और उन की पीठों को दागा जाएगा (और) कहा जाएगा यही है वह (सोना चाँदी), जिस को तुम ने अपने लिए जमा किया था, तो (अब) अपने जमा किए हुए का मज़ा चखो।”

📕 सुर तौबाह ३४-३५

7. दुनिया के बारे में

माल व औलाद दुनिया के लिए ज़ीनत

क़ुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है :

“माल और औलाद यह सिर्फ दुनिया की जिंदगी की एक रौनक है और (जो) नेक आमाल हमेशा बाकी रहने वाले हैं, वह आपके रब के नज़दीक सवाब और बदले के एतबार से भी बेहतर हैं और उम्मीद के एतबार से भी बेहतर हैं “(लिहाजा नेक अमल करने की पूरी कोशिश करनी चाहिये और उस पर मिलने वाले बदले की उम्मीद रखनी चाहिये)” 

📕 सूर-ए-कहफ :४६

8. आख़िरत के बारे में

दोज़ख के कपड़े

हज़रत उमर (र.अ) फर्माते हैं कि हज़रत जिब्रईल (अ.स)  ने रसूलुल्लाह (ﷺ) से अर्ज़ किया :

“मुझे उस ज़ात की क़सम जिसने आप को हक़ पर मबऊस फर्माया, अगर दोज़ख के कपड़ों में से किसी कपड़े को आस्मान और ज़मीन के दर्मियान लटका दिया जाए, तो ज़मीन पर रहने वाले सब जानदार उसकी गर्मी से हलाक हो जाएंगे।”

📕 तबरानी : २६८३

9. तिब्बे नबवी से इलाज

दुआए जिब्रईल (अ.स)  से इलाज है

हज़रत आयशा (र.अ)  बयान करती हैं के जब रसूलुल्लाह (ﷺ) के बीमार हुए तो जिब्रईल (अ.स)  ने इस दुआ को पढ़कर दम किया।

 قَالَ بِاسْمِ اللَّهِ يُبْرِيكَ وَمِنْ كُلِّ دَاءٍ يَشْفِيكَ وَمِنْ شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ وَشَرِّ كُلِّ ذِي عَيْنٍ

📕 मुस्लिम : ५६९९

10. नबी (ﷺ) की नसीहत

झूठ से बचते रहो

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : 

“झूठ से हमेशा बचते रहो, क्योंकि झूठ बोलने की आदत आदमी को बुराई के रास्ते पर डाल देती है और बुराई उस को दोजख तक पहुँचाती है और जब आदमी झूट बोलने का आदी हो जाता है, तो उस का अंजाम यह होता है के वह अल्लाह के यहाँ झूठों में लिख दिया जाता है।”

📕 मुस्लिम:६६३९, अन अब्दुल्लाह बिन मसऊद (र.अ) 

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