17. रमजान | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

17. रमजान | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

17. Ramzan | Sirf Paanch Minute ka Madarsa

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1. इस्लामी तारीख

ताइफ़ में इस्लाम की दावत

“सन १० नब्वी में अबू तालिब के इन्तेकाल के बाद कुफ्फारे मक्का ने रसूलुल्लाह (ﷺ)को बहुत ज़्यादा सताना शुरू कर दिया। लिहाज़ा अहले मक्का से मायूस हो कर आप (ﷺ)इस खयाल से ताइफ तशरीफ ले गए के अगर ताइफ वालों ने इस्लाम कबूल कर लिया, तो वहाँ इस्लाम के फैलने की बुनियाद पड़ जाएगी। ताइफ में बनू सकीफ का खानदान सब से बड़ा था, उन के सरदार अब्द या लैल, मसऊदी और हबीब थे। यह तीनों भाई थे।

हुज़ूर (ﷺ)ने इन तीनों को इस्लाम की दावत दी। इन में से किसी ने भी कबूल न किया फिर आप (ﷺ)ने आम लोगों को इस्लाम की दावत दी, मगर किसी ने आप (ﷺ)की दावत को क़बूल नहीं किया और कहा के फौरन हमारे शहर से निकल जाओ। जब आप (ﷺ)अपने आज़ाद कर्दा गुलाम जैद बिन हारिसा (र.अ)  के साथ वहाँ से वापस हुए, तो उन लोगों ने औबाश लड़कों को पीछे लगा दिया, जिन्होंने आप को पत्थर मार-मार कर ज़ख्मी कर दिया। किसी तरह बच कर हुज़ूर (ﷺ)एक अंगूर के बाग में तशरीफ ले गए, वहाँ अल्लाह तआला ने ताइफ वालों पर अज़ाब के लिए फरिश्ते रवाना किए, मगर रहमते दो आलम ने उन की हलाकत व बरबादी को गवारा न किया, बल्कि उन के हक में हिदायत की दुआ भी फर्मा दी और उन के मुसलमान होने की उम्मीद ज़ाहिर की।”

2. अल्लाह की कुदरत

आसमान में तारे किसने बनाए ?

“रात के वक्त आसमान में अनगिनत तारे झिलमिलाते हुए नज़र आते हैं, जिस से आसमान बहुत खूबसूरत नज़र आता है, इन्सान रात के वक्त खुले आसमान के नीचे बिस्तर लगा कर आसमान के सितारों को देखता रहे तब भी उस का जी न भरेगा; हमें अल्लाह तआला की कुदरत में गौर करना चाहिए, कि उस ने इन सितारों को कितने अच्छे निज़ाम के साथ जोड़ रखा है, के न तो आपस में टकरा कर खत्म होते हैं न तो ज़मीन पर गिर कर ज़मीन पर तबाही फैलाते हैं, यह अल्लाह तआला का बनाया हुआ निज़ाम है, जिसने हर चीज़ को ठीक-ठीक बनाया है।”

3. एक फर्ज के बारे में

औरतों पर भी ज़कात देना फ़र्ज़ है

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है :

“तुम (औरतें) नमाज़ की पाबंद रहो और ज़कात अदा करती रहो और अल्लाह और उसके रसूल की फर्मा बरदारी करती रहो।”

📕 सूर-ए-अह्ज़ाब-33

वजाहत: अगर औरतों के पास निसाब के बराबर ज़रूरत से ज़्यादा माल हो या सोना या चांदी हो और उस पर साल गुज़र जाए, तो उस में से ज़कात निकालना फ़र्ज़ है।

4. एक सुन्नत के बारे में

बैतुलखला जाने का सुन्नत तरीका

(१) सर ढांक कर जाना,

(२) जुता या चप्पल वगैरह पहन कर जाना

(३) दुआ पढ़ कर जाना

(४) पहले बायां पाँव अंदर रखना

(५) किबला की तरफ न रुख करना और पीठ न करना

(६) बिल्कुल बातचीत न करना

(७) खड़े होकर पेशाब न  करना

(८) बाएं हाथ से इस्तिंजा करना 

(९) इस्तिजा के बाद मिट्टी से या साबुन वगैरह से अच्छी तरह हाथ धोना

(१०) दाएँ पाँव से बाहर आना

(११) बाहर आने के बाद दुआ पढ़ना।

5. एक अहेम अमल की फजीलत

हज व उमरा की निय्यत से निकलना

रसूलुल्लाह (ﷺ)ने फ़रमाया :

“जो शख्स हज के इरादे से निकला और रास्ते में मर गया तो कयामत तक उसके नाम-ए-आमाल में हज करने वाले के बराबर सवाब लिखा जाएगा और जो आदमी उमरा के इरादे से निकला और रास्ते में मर गया तो कयामत तक उस के नाम-ए-आमाल में उमरा करने वाले के बराबर सवाब लिखा जाएगा!”

📕 अबू याला: ६२२७, अन अबी हुरैरह (र.अ) 

6. एक गुनाह के बारे में

तीन किस्म के लोगों का अंजाम

रसूलुल्लाह (ﷺ)ने फर्माया : 

“तीन शख्स ऐसे हैं कि कयामत के दिन अल्लाह तआला न उनसे बात करेंगे और न उनकी तरफ (रहमत की नज़र से) देखेंगे और न उनको पाक व साफ करेंगे और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब होगा”

हज़रत अबूजर (र.अ)  के फर्माते हैं के मैंने पूछा के अल्लाह के रसूल (ﷺ) वह कौन लोग हैं? 

तो आपने तीन मर्तबा यही बात कही, फिर मैं ने पूछा के अल्लाह के रसूल (ﷺ)वह कौन लोग हैं?

तो आप (ﷺ)ने फर्माया: 

1- टखने से नीचे (कपड़े) लटकाने वाला,

2- एहसान जतलाने वाला,

3- तीसरा झूटी कसम खा कर अपना सामान बेचने वाला।

📕 अबू दाऊद: ४०८७, अन अबीज़र (र.अ) 

7. दुनिया के बारे में

गुनहगारों को नेअमत देने का मक़सद

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

“जब तू यह देखे के अल्लाह तआला किसी गुनहगार को उस के गुनाहों के बावजूद दुनिया की चीज़ें दे रहा है, तो यह अल्लाह तआला की तरफ से ढील है।”

📕 मुसनद अहमद : १६८६०, अन उक़बा बिन आमिर (र.अ) 

8. आख़िरत के बारे में

कयामत का हौलनाक मंज़र

क़ुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है : 

“जब कानों के पर्दे फाड़ देने वाला शोर बर्पा होगा तो उस दिन आदमी अपने भाई से अपनी माँ से और बाप से अपनी बीवी और बेटों से भागेगा उस दिन हर शख्स की हालत ऐसी होगी जो उस को हर एक से बेखबर कर देगी’

📕 सूर अबस: 88:33-37

9. तिब्बे नबवी से इलाज

तरबूज़ (Watermelon) के फवाइद

“रसूलल्लाह (ﷺ) तरबूज़ को तर खजूर के साथ खाते और फर्माते के हम इस खजूर की गर्मी को तरबूज़ की ठंडक के ज़रिये और तरबूज़ की ठंडक को खजूर की गर्मी के ज़रिये खत्म करते हैं।”

📕 अबू दाऊद : ३८३६. अन आयशा (र.अ) 

वजाहत: तरबूज़ गर्मी की शिद्दत को कम करता है, और गर्मी की वजह से होने वाले सरदर्द में मुफीद है।

10. कुरआन की नसीहत

अल्लाह फुज़ूल खर्ची करने वालों को पसंद नहीं करता

क़ुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है : 

“ऐ आदम की औलाद! तुम हर मस्जिद में हाज़री के वक्त अच्छा लिबास पहन लिया करो और खाओ-पियो और फुज़ूल खर्ची मत किया करो, बेशक अल्लाह तआला फुज़ूल खर्ची करने वालों को पसंद नहीं करता।”

📕 सूर-ए-आराफ:३१

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