19. रमजान | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

19. रमजान | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

19. Ramzan | Sirf Paanch Minute ka Madarsa

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1. इस्लामी तारीख

रसूलुल्लाह (ﷺ) की हिजरत

“जब रसूलुल्लाह (ﷺ) को हिजरत का हुक्म हुआ तो आप हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (र.अ)  के घर तशरीफ ले गए और मशवरा कर के हिजरत की तैयारी शुरू कर दी और रात की तारीकी में हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (र.अ)  के साथ रवाना हो गए। चूंकि मुखालफत का ज़ोर था और कुफ्फार आप (ﷺ) के कत्ल के दरपे थे, इसलिए मक्का से चार पाँच मील के फासले पर एक पहाड़ के गार में जिसे “गारे सौर” कहा जाता है, वहाँ चले गए। कुफ्फारे मक्का आप (ﷺ) की तलाश में निकले और गार तक पहुँच गए, हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (र.अ)  घबरा गए, मगर रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया:

“घबराओ नहीं ! खुदा हमारे साथ है।”

कुफ्फार इन दोनों हज़रात को न देख सके और वापस चले गए। रसूलल्लाह (ﷺ) उस गार में तीन रोज़ रहे, चौथे रोज़ वहाँ से रवाना हो गए और रात-दिन बराबर चलते रहे, रास्ते में सुराका नामी एक शख्स ने आप (ﷺ) का पीछा किया, मगर वह भी नाकाम व नामुराद हुआ, बिल आखिर रसूलुल्लाह (ﷺ) मशक्कत व खतरात से भरा हुआ सफर तय करते हुए मदीना पहुँचे, जहाँ आप (ﷺ) का पुर जोश इस्तिकबाल हुआ।”

2. अल्लाह की कुदरत

ज़मीन में सारे खज़ाने अल्लाह ने रखे हैं

अल्लाह तआला ने ज़मीन के अंदर मुख्तलिफ किस्म के तेल के खज़ाने रखे हैं, जिन में पेट्रोल, डीज़ल और मिट्टी का तेल इन्सानी तरक्की के लिए बहुत ही अहम और ज़रूरी हैं, आज तेल की जितनी अहेमियत व ज़रुरत है, उतनी पहले कभी न थी, इन्सान दिन-रात मुसलसल तेल निकालता ही जा रहा है,लेकिन तेल के ज़खाइर के खत्म होने का अंदेशा ही नहीं, अंदाज़ा लगाइए. अगर यह तेल के ज़खीरे खत्म हो जाएँ तो इन्सानी जिंदगी ठहर जाएगी, ज़रा गौर कीजिए के ज़मीन के अंदर तेल के यह ज़खीरे किस ने रखे? यकीनन यह अल्लाह तआला के उस खज़ाने से है जिस के बारे में अल्लाह तआला ने क़ुरआन में फर्माया है :

“और हमारे पास हर चीज़ के खजाने हैं. और हम उसे एक मुतअय्यन अंदाज़ से उतारते हैं।”

📕 सूर-ए-हिज:२१ 

3. एक फर्ज के बारे में

वालिदैन के साथ अच्छा बर्ताव करना

क़ुरआन में अल्लाह तआला फ़रमाता है : 

“वालिदैन के साथ अच्छा सुलूक करो।”

📕 सूर-ए-बनी इसराईल : २३

वजाहत: वालिदैन कितनी मेहनत व मशक्कत से बच्चों की परवरिश करते हैं, इसलिए वालिदैन के साथ अच्छाई का मामला करना और उन की ज़रुरियात को अपनी ताकत और हैसियत के मुताबिक पूरा करना ज़रूरी है।

4. एक सुन्नत के बारे में

ज़ोहर से पहले की चार रकात सुन्नते मोअक्कदा है 

“हज़रत आयशा (र.अ)  बयान फर्माती हैं कि सरवरे कायनात ज़ोहर से पहले चार रकात और फज्र से पहले दो रकात कभी नहीं छोड़ते थे।”

📕 बुखारी : १९८२

5. एक अहेम अमल की फजीलत

क़ुरआन के हुक्म पर अमल करने का इन्आम

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

“जो शख्स कुरआन पढ़े, सीखे और उस पर अमल करे, तो उस को कयामत के दिन नूर से बना हुआ ताज पहनाया जाएगा, जिसकी रौशनी सूरज की रौशनी की तरह होगी। उस के वालिदैन को ऐसे दो जोड़े पहनाए जाएंगे कि तमाम दुनिया उसका मुकाबला नहीं कर सकती है। वह अर्ज़ करेंगे: यह जोड़े हमें किस वजह से पहनाए गए? 

इरशाद होगा :

“तुम्हारे बच्चे के कुरआन मजीद पढ़ने के बदले में।”

📕 मुस्तदरक : २०८५, अन बुरैदह बिन असलमी (र.अ)

6. एक गुनाह के बारे में

शिर्क और कत्ल करना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

“अल्लाह तआला हर गुनाह को माफ कर सकता है, मगर उस आदमी को माफ नहीं करेंगे, जो शिर्क की हालत में मर जाए, दूसरा वह आदमी जो किसी मुसलमान भाई को जान बूझ कर कत्ल कर दे।”

📕 अबू दाऊद : ४२७७. अन अबी दर्दा (र.अ) 

7. दुनिया के बारे में

दुनिया का फायदा वक्ती है

एक मर्तबा रसूलुल्लाह (ﷺ) ने अपनी तकरीर में फर्माया : 

“गौर से सुन लो ! दुनिया एक वक्ती फायदा है, जिससे हर शख्स फायदा उठाता है, चाहे नेक हो या गुनहगार।”

📕 मुअजने कबीर : ७०१२, अन शहाद बिन औस (र.अ) 

8. आख़िरत के बारे में

अहले जन्नत का शुक्र अदा करना

क़ुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है :

“(जन्नती जन्नत में दाखिल हो कर) कहेंगे कि हम्द और शुक्र उस अल्लाह के लिए है, जिसने हम से हर किस्म का ग़म दूर कर दिया। बेशक हमारा रब बड़ा बख्शने वाला, बड़ा कद्रदान है, जिस ने अपने फज्ल से हम को हमेशा रहने कीजगह में उतारा। जहाँ न हम को कोई तकलीफ़ पहुँचेगी और न हम को किसी किस्म की थकान महसूस होगी।”

📕 सूर-ए-फातिर: ३४ ता ३५

9. तिब्बे नबवी से इलाज

दस्त (बकरी की अगली रान) के फवाइद

“रसूलुल्लाह (ﷺ) को दस्त (अगली रान) का गोश्त बहुत पसंद था।” 

📕 बुखारी : ३३४०, अन अबी हुरैरह (र.अ) 

वजाहत: अल्लामा इब्ने कय्यिम ने लिखा है कि बकरी के गोश्त में सबसे हल्की गिज़ा का हिस्सा गर्दन और दस्त है, इस के खाने से मेअदे में भारीपन नहीं होता।

10. कुरआन की नसीहत

अल्लाह हद से निकल जाने वालों को पसंद नहीं करता

क़ुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है : 

“तुम अपने रब से गिड़गिड़ा कर और चुपके चुपके (भी) दुआ किया करो, बेशक अल्लाह तआला हद से निकल जाने वालों को पसंद नहीं करता और ज़मीन में उस की इस्लाह के बाद फसाद मत फैलाओ और अज़ाब का डर और रहमत की उम्मीद रखते अल्लाह की इबादत किया करो, यकीनन अल्लाह तआला की रहमत अच्छे काम करने वालों के करीब है।”

📕 सूर-ए-आराफ:५५सा ५६

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