20. रमजान | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

20. रमजान | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

20. Ramzan | Sirf Paanch Minute ka Madarsa

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1. इस्लामी तारीख

मस्जिदे कुबा की तामीर 

“मदीना मुनव्वरा से तकरीबन तीन मील के फ़ासले पर एक छोटी सी बस्ती है जिसका नाम क़ुबा है, यहाँ अन्सार के बहुत से खानदान आबाद थे और कुलसूम बिन हदम उन के सरदार थे। हिजरत के दौरान हुज़ूर (ﷺ) ने पहले यहीं कयाम फर्माया और कुल्सूम बिन हदम के घर मेहमान हुए। हुज़ूर (ﷺ) ने यहाँ अपने मुबारक हाथों से एक मस्जिद की बुनियाद डाली जिस का नाम “मस्जिदे कुबा” है।

मस्जिद की तामीर में सहाबा के साथ- साथ आप (ﷺ) खुद भी काम करते थे और भारी-भारी पत्थरों को उठाते थे। एक सहाबी ने यह शेर कहा :

तर्जुमा : अगर हम बैठे रहें और नबी काम करें, तो हमारा यह अमल गुमराही का सबब होगा

यही वो मस्जिद है जिसकी शान में क़ुरआन मजीद में है-

यानि वह मस्जिद जिसकी बुनियाद पहले ही दिन से परहेज़गारी पर रखी गई है वह इस बात की ज़्यादा मुस्तहिक है कि आप (ﷺ) इस में (नमाज़ के लिए) खड़े हों। इस में ऐसे लोग हैं जिनको सफाई बहुत पसंद है और खुदा साफ व पाक रहने वालो को पसंद फर्माता है।

हुजूर (ﷺ) यहाँ चौदह दिन कयाम फर्मा कर जुमा के दिन मदीना तैयबा के लिये रवाना हो गए।”

2. हुजूर (ﷺ) का मुअजीजा

ऊँट का आप (ﷺ) से शिकायत करना 

“एक दफा रसूलुल्लाह (ﷺ) एक अन्सारी के बाग में तशरीफ ले गए, वहाँ एक ऊँट खड़ा था, रसूलल्लाह (ﷺ) को देख कर बिलबिलाने लगा और उस की दोनों आँखों में आँसू डबडबा आए। रसूलुल्लाह (ﷺ) ने करीब जा कर उसके सर और कनपट्टी पर हाथ फेरा, तो वह चुप हो गया, आप (ﷺ) ने दरयाफ्त किया के यह किस का ऊँट है?

तो एक नौ जवान अन्सारी सहाबी आए, आपने उन से फर्माया : क्या तुम इन जानवरों के बारे में अल्लाह से नहीं डरते? जिनको खुदा ने तुम्हारे ताबे बनाया है, इस ऊँट ने मुझसे शिकायत की है कि तुम इस को भूखा रखते हो और इस को तकलीफ़ देते हो।”

📕 अबू दाऊद : २५४९, अन अब्दुल्लाह बिन जाफर (र.अ) 

3. एक फर्ज के बारे में

सब से पहले नमाज़ का हिसाब होगा

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : 

“कयामत में सबसे पहले नमाज़ का हिसाब लिया जाएगा, अगर वह अच्छी और पूरी निकल आई तो बाकी आमाल भी पूरे उतरेंगे और अगर वह खराब हो गई तो बाका आमाल भी खराब निकलेंगे।”

📕 तिर्मिज़ी : ४१३, अन अबी हुरैरह (र.अ) 

4. एक सुन्नत के बारे में

नया लिबास पहनने की दुआ 

रसूलुल्लाह (ﷺ)  ने फर्माया : 

“जो बन्दा नया कपड़ा पहने और कहे

الحمدلله الذی کسانی ما و اړی په عؤرتى رأتجمل به في حياتي)

तर्जुमा : तमाम तारीफें उस अल्लाह के लिए हैं, जिस ने मुझे वह लिबास अता फर्माया, जिससे में अपना जिस्म छुपाता हुँ और अपनी जिंदगी में जेब व ज़ीनत हासिल करता हूँ, फिर इस (दुआ के पढ़ने) के बाद पुराना लिबास सदका कर दे, तो वह जिंदगी में और मरने के बाद अल्लाह तआला की हिफाज़त व अमानत में रहेगा।

📕 तिर्मिज़ी : ३५६०,अन उमर बिन ख़त्ताब (र.अ) 

5. एक अहेम अमल की फजीलत

सदका मुसीबतों को दूर करता है

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया: 

“सदका मुसीबत के सत्तर दरवाज़े बंद कर देता है।”

एक दूसरी हदीस में है के आप (ﷺ) ने फर्माया : 

“सदका अल्लाह तआला के गुस्से को ठंडा करता है और बुरी मौत से बचाता है।”

📕 तबरानी कबीर : ४२७६, अन राफेअ बिन खदीज (र.अ) , तिर्मिज़ी:६६४

6. एक गुनाह के बारे में

झूठी तोहमत लगाना

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है : 

“जो लोग मुसलमान मर्दों और औरतों को बगैर किसी जुर्म के तोहमत लगा कर तकलीफ़ पहुँचाते हैं, तो यकीनन वह लोग बड़े बोहतान और खुले गुनाह का बोझ उठाते हैं।”

📕 सूर-ए-अहज़ाब: ५८

7. दुनिया के बारे में

दुनियावी जिंदगी एक धोका है

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता : 

“ऐ लोगो ! बेशक अल्लाह तआला का वादा सच्चा है, फिर तुम को दुनियवी जिंदगी धोके में न डाल दे और तुम को धोके बाज़ शैतान किसी धोके में न डाल दे, यकीनन शैतान तुम्हारा दुशमन है। तुम भी उसे अपना दुशमन ही समझो। वह तो अपने गिरोह (के लोगों को) इसलिए बुलाता है कि वह भी दोज़ख वालों में शामिल हो जाएं।” 

📕 सूर-ए-फातिर ५ ता ६

8. आख़िरत के बारे में

अल्लाह का अहले जन्नत से कलाम

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : 

“अल्लाह तआला अहले जन्नत से फर्माएगा: 

ऐ जन्नत वालो! तो वह कहेंगे, ऐ हमारे रब! हम हाज़िर हैं और सारी भलाई तेरी कुदरत में है । अल्लाह तआला फरमाएगा: 

क्या तुम राज़ी हो गए? तो कहेंगे, हम राज़ी क्यों नहीं होंगे? ऐ अल्लाह! तूने हमें वह नेअमत अता फर्माई है, जो अपनी किसी मखलूक को अता नहीं की।

अल्लाह तआला फर्माएगा : 

क्या मैं तुम्हें इससे भी बेहतर नेअमत अता कर दूँ? वह अर्ज़ करेंगे:

“इस से बेहतर और कौन सी नेअमत होगी? तो अल्लाह तआला फरमाएगा: मैं हमेशा के लिए तुमसे राज़ी हो गया, इसके बाद कभी तुमसे नाराज़ नहीं होंऊगा।”

📕 मुस्लिम : ७१४०, अन अबी सईद खुदरी (र.अ) 

9. तिब्बे नबवी से इलाज

खतना के फवाइद

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया:

“पाँच चीजें फितरत में से हैं, उनमें से एक ख़तना करना है।”

📕 मुस्लिम: ५९८, अन अबी हुरैरह (र.अ) 

वजाहत: खत्ना करने से शरमगाह के कैंसर, ऐगज़ीमा और गुर्दे की पथरी जैसी बीमारियों से हिफाज़त होती है।

10. नबी (ﷺ) की नसीहत

अल्लाह तआला से दुआ किया करो

“ईमान तुम्हारे दिलों में इस तरह पुराना हो जाता है, जिस तरह कपड़ा पुराना हो जाता है, लिहाज़ा अल्लाह तआला से दुआ किया करो कि वह तुम्हारे दिलों में ईमान को ताज़ा रखें।”

📕 मुस्तदरक हाकिम: ५, अन अब्दुल्लाह बिन अम्र (र.अ) 

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