21. शव्वाल | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

21. शव्वाल | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

21. Shawwal | Sirf Paanch Minute ka Madarsa

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1. इस्लामी तारीख

हज़रत मारिया किबतिया (र.अ)

हजरत मारिया किबतिया (र.अ) हुजूर के बेटे इब्राहीम की वालिदा हैं।

हुजूर (ﷺ) ने हजरत हातिब इब्ने बल्त के हाथ शाहे असकंदरिया मकूकस के पास खत भेजा, जिसने खत को बोसा दिया। और हुजूर के एलची हज़रत हातिब (र.अ) का बड़ा इकराम किया, वापसी में हजरत हातिब के हमराह दीगर तोहफ़े के साथ तीन बांदियां मी रवाना किया, इन तीन बांदियों में एक हजरत मारिया किबतिया (र.अ) और उनकी बहन सीरीन थीं, हजरत हातिब (र.अ) ने उन को इस्लाम की रगबत दिलाई।

यह दोनों बहनें मुसलमान हुईं, बेहतरीन दीनदार बनी, हुजूर (ﷺ) ने सीरीन को हजरत हस्सान (र.अ) को दिया और मारिया (र.अ) को अपनी खिदमत में रखा, हजरत मारिया (र.अ) से जिल हिजा सन ८ हिजरी में हुजूर (ﷺ) के एक बेटे इब्राहीम (र.अ) पैदा हुए, जिन की वजह से हजरत मारिया में उम्मे वलद हो गई, हजरत इब्राहीम (ﷺ) का इन्तेकाल अठारा माह की उम्र में हुआ,

हुजूर (ﷺ) की वफ़ात के बाद हजरत अबू बक्र और उमर इन की खिदमत में हदिये का माल भेजा करते थे, हजरत मारिया किबतिया (र.अ) की वफ़ात मुहर्रम सन १६ हिजरी में हुई और बकी में दफ़न हुई।

2. अल्लाह की कुदरत

ऊँट में अल्लाह की निशानी

अल्लाह तआला ने इस दुनिया में मुख्तलिफ़ किस्म के जानवर पैदा किए, इन में से एक जानवर ऊँट है, अल्लाह तआला ने अपनी कुदरत से इस को ऐसी खूबियां दी हैं के वह हफ्ते भर का पानी अपने अंदर जमा कर लेता है और जब इस को रेगिस्तानी इलाके में पानी की जरूरत होती है, तो उस को इस्तेमाल करता है, इसी तरह ऊँट के पैर नर्म गद्दी की तरह होते हैं, जिसकी वजह से वह रेत में नहीं धंसते और वह आसानी से रेत पर चलता है और भागता है।

इसी तरह अल्लाह ने हर जानदार को उस की जरूरत की चीजें अपनी कुदरत से अता फर्माई हैं।

3. एक फर्ज के बारे में

नमाज़ में खामोश रहना

हजरत जैद बिन अरकम (र.अ) फर्माते हैं के

(शुरू इस्लाम में) हम में से बाज़ अपने बाजू में खड़े शख्स से नमाज़ की हालत में बात किया करता था, फ़िर यह आयत नाजिल हुई,

“अल्लाह के लिए खामोशी के साथ खड़े रहो (यानी बातें न करो)” फिर हमें खामोश रहने का हुक्म दे दिया गया और बात करने से रोक दिया गया।

📕 तिर्मिज़ी : ४०५

वजाहत: नमाज में खामोश रहना और हर किस्म के नमाज़ के मनाफी काम करने से बचना जरूरी है।

4. एक सुन्नत के बारे में

तहनीक सुन्नत है

हजरत अस्मा (र.अ) फरमाती हैं के जब अब्दुल्लाह बिन जुबैर (र.अ) पैदा हुए, तो मैं ने उन को रसूलुल्लाह (ﷺ) की गोद में दिया, रसूलुल्लाह (ﷺ) ने खजूर मंगवाई और चबा कर अपना मुबारक थूक अब्दुल्लाह के मुँह के अंदर लगाया।

📕 बुखारी: ५४६९

5. एक अहेम अमल की फजीलत

जहन्नम की आग से आंखों की हिफाजत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया:

“दो आँखो को जहन्नम की आग नहीं लगेगी, एक वह आँख जो अल्लाह के खौफ से रोई हो और एक वह आंख जिसने अल्लाह की राह में पहरा दिया हो।”

📕 तिर्मिजी: १६३९, अन इब्ने अब्बास (र.अ)

6. एक गुनाह के बारे में

इज़ार या पैन्ट टखने से नीचे पहनना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया:

“जो शख्स तकब्बुर के तौर पर अपने इजार को टखने से नीचे लटकाएगा, अल्लाह तआला कयामत के दिन उसकी तरफ़ रहमत की नजर से नहीं देखेगा।”

📕 बुखारी : ५७८८, अन अबी हुरैरह (र.अ)

7. दुनिया के बारे में

जरूरत से जाइद सामान शैतान के लिए

रसुलल्लाह (ﷺ) ने हजरत जाबिर बिन अब्दुल्लाह (र.अ) से फ़रमाया:

“एक बिस्तर आदमी के लिए और एक उस की बीवी के लिए और तीसरा मेहमान के लिए और चौथा शैतान के लिए होता है।”

📕 मुस्लिम : ५४५२

8. आख़िरत के बारे में

कयामत का हौलनाक मंजर

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:

“(कयामत का मुन्किर) पूछता है के कयामत का दिन कब आएगा? जिस दिन आंखें हैरान रह जाएंगी और चांद बेनूर हो जाएगा और सूरज व चांद (दोनों बेनूर हो कर) एक हालत पर कर दिए जाएंगे। उस दिन इन्सान कहेगा: आज कहीं भागने की जगह है? जवाब मिलेगा: हरगिज़ नहीं (आज) कहीं पनाह की जगह नहीं है, उस दिन सिर्फ आप के रब के पास ठिकाना होगा।”

📕 सूर-ए-कियामहः ६ ता १२

9. तिब्बे नबवी से इलाज

निमोनिया का इलाज

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने निमोनिया के लिए वर्स, कुस्त और रोग़ने जैतून पिलाने को मुफीद बतलाया है।

📕 इब्ने माजा : ३४६७. अन जैद बिन अरक्रम(र.अ)

वजाहत: “वर्स” तिल के मानिंद एक किस्म की घास है, जिससे रंगाई का काम लिया जाता है और “कुस्त” एक खुशबूदार लकड़ी है, जिसको ऊदे हिंदी भी कहते हैं।

10. कुरआन की नसीहत

तुम उन लोगों की तरह मत हो जाना

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:

“तुम उन लोगों की तरह मत हो जाना जो अपने घरों से इतराते हूए और लोगों को दिखाने के लिए निकले और लोगों को अल्लाह के रास्ते से रोक रहे थे और अल्लाह उनके तमाम कामों को अपने घेरे में लिए हुए है।”

📕 सूर-ए-अन्फाल : 47

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