30. रमजान | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

30. रमजान | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

30. Ramzan | Sirf Paanch Minute ka Madarsa

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1. इस्लामी तारीख

रसूलुल्लाह (ﷺ) की वफात

हुज़ूर (ﷺ) जिस माहौल की इसलाह के लिए भेजे गए थे, आप (ﷺ) ने २३ साल की मुखतसर जिंदगी में इन्किलाब बरपा कर दिया, ज़लालत व गुमराही में भटकी हूई इन्सानियत को हिदायत व रहनुमाई का नमूना बना दिया, ज़ुल्म  सितम और चोरी व डाका ज़नी खत्म करके मुहब्बत व भाईचारगी व अमन व अमान की बुनियाद डाल दी।

अलगर्ज़ जब आप (ﷺ) ने तबलीग व रिसालत का फरीज़ा अन्जाम दे दिया और जिस मक़सद के लिए आप (ﷺ) को भेजा गया था, उसको मुकम्मल फरमा दिया, तो हज़रत जिबरईल (अ.स) ने आकर इत्तिला दी, कि अब आप (ﷺ) की वफात का वक्त आ गया है, चुनांचे माहे सफर के आखिर में मर्ज़ शुरू हुआ और बढ़ता चला गया, फिर अपनी अज़वाजे मुतहरात से इजाज़त लेकर हज़रत आयशा (र.अ)  के घर में कयाम फर्माया।

उस दौरान सहाबा (र.अ) को कुछ नसीहतें भी फर्माते रहे, लेकिन मर्ज़ की शिद्दत बढ़ती जा रही थी, बिल आखिर

अल्लाह्हुम्माग़-फ़िरली-वरहमनी-बिर-राफ़िक़िल-आला-अल्लाह-हुम्मा-फ़िर-रफ़ीक़िल-आला

कहते हुए रबिउल अव्वल में पीर के दिन, कयामत तक आने वाली नस्लों के सामने दस्तूरे जिंदगी देकर इस दुनिआ से रुख्सत कर गए।

आप (ﷺ) की वफात की खबर मुसलमानों पर बिजली बन कर गिरी, सहाब-ए-किराम (र.अ) मुहसिने इन्सानियत की जुदाइगी पर अक्ल व हवास खो बैठे, हर एक पर मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा, सभी रंज व गम से निढाल हो गए, चुनांचे हज़रत अबू बक्र (र.अ) आगे आये और आप ने यह खुत्बा फ़रमाया :

“तुम मे से जो शख्स मुहम्मद (ﷺ) की परशतीश करता था वो जान ले मुहम्मद (ﷺ) की वफ़ात हो गयी है। और तुम मे से जो शख्स अल्लाह की परशतीश करता है तो वो जान ले के अल्लाह ज़िंदा है और वो कभी मरने वाला नहीं।”

फिर उसके बाद हजरते अबू बकर सिद्धिक (र.अ.) ने सूरह इमरान की आयत 144 तिलावत फरमायी:

“और मोहम्मद (ﷺ) तो एक रसूल है, उनसे पहले बोहोत रसूल हो चूके है तो क्या अगर वो इंतेकाल फरमा जाए या शहीद हो जाए तो तुम उलटे पाँव फिर जाओगे? फिर जो उलटे पाँव फिरेगा अल्लाह का कुछ नुकसान न करेगा। और अनकरीब अल्लाह शुक्र अदा करने वालों को सवाब देगा।”

📕 अल-कुरान: सूरह आले इमरान 3:144

फिर लोगों को समझाया और सब्र दिलाया, मंगल और बुध की दर्मियानी रात में तदफीन अमल में आई।”

📕 12 रब्बी-उल-अव्वल की हक़ीक़त

2. अल्लाह की कुदरत

थोड़ा सा खाना हज़ार आदमियों को काफ़ी हो गया

हज़रत जाबिर (र.अ) फर्माते हैं कि गज़व-ए-खन्दक के मौके पर मैंने बकरी का एक बच्चा ज़बह किया और मेरी बीवी ने जौ का आटा गूंधा और गोश्त की हांडी चूल्हे पर चढ़ा दी और मैं रसूलुल्लाह (ﷺ) के पास गया और अर्ज़ किया-

या रसूलल्लाह (ﷺ) चंद आदमियों को अपने साथ लेकर घर तशरीफ़ ले चलें, लेकिन आप (ﷺ) ने तमाम सहाबा (र.अ) में एलान फरमा दिया कि जाबिर ने तुम्हारी दावत की है।

हज़रत जाबिर (र.अ)  फर्माते हैं कि मैं घबरा गया, लेकिन आप (ﷺ) तशरीफ़ लाए और खुदा की कसम सबने इतने थोड़े से खाने को खूब पेट भर खाया, फिर भी हांडी भरी हुई थी और आटा भी कुछ कम नही हुआ था, हालांकि सहाबा (र.अ) 8 हज़ार की तादाद में थे।”

📕 बुखारी : ४१०२

3. एक फर्ज के बारे में

कज़ा नमाजों की अदायगी

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:

“जो कोई नमाज़ पढ़ना भूल गया या नमाज़ के वक्त सोता रह गया, तो उसका कफ्फारा यह है के जब याद आए उसी वक्त पढ़ ले।”

📕 तिर्मिज़ी : १७७ अन अबी कतादा (र.अ)

वजाहत: अगर किसी शख्स की नमाज़ किसी उज्र की वजह से छूट जाए या सोने की हालत में नमाज़ का वक्त गुज़र जाए, तो बाद में उसकी कज़ा पढ़ना फ़र्ज़ है।

4. एक सुन्नत के बारे में

तमाम मुसलमानों के लिए दुआ करना

अगले पिछले तमाम मुसलमानों के लिए दुआए मग़फ़िरत इस तरह करे-

رَبَّنَا ٱغْفِرْ لَنَا وَلِإِخْوَٰنِنَا ٱلَّذِينَ سَبَقُونَا بِٱلْإِيمَـٰنِ وَلَا تَجْعَلْ فِى قُلُوبِنَا غِلًّۭا لِّلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ رَبَّنَآ إِنَّكَ رَءُوفٌۭ رَّحِيمٌ

📕 सूरह हश्र : १०

5. एक अहेम अमल की फजीलत

अच्छे अख्लाक़ पर जन्नत के आला दर्जात

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया: 

“जो बातिल पर रहते हुए झूट बात छोड़ दे, उसके लिए जन्नत के इर्द-गिर्द घर बनाया जाएगा और जो हक पर रहते हुए झगड़ा छोड़ दे, उस के लिए जन्नत के बिलकुल बीच में घर बनाया जाएगा और जिसके अख्लाक अच्छे हों उसके लिए जन्नत के आला दर्जे पर घर बनाया जाएगा।”

📕 तिर्मिज़ी : १९९३, अन अनस बिन मालिक (र.अ) 

6. एक गुनाह के बारे में

मुसलमानों को तकलीफ पहुँचाने का गुनाह

क़ुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है: 

“जिन लोगों ने मुसलमान मर्द और मुसलमान औरतों को तकलीफ़ पहुचाई फिर तौबा भी नही की, तो उनके लिए दोज़ख (जहन्नुम) और सख्त जलने का अज़ाब है।”

📕 सूरह बुरूज : १

7. दुनिया के बारे में

माल जमा कर के खुश होना

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है :

“जो शख्स (इन्तेहाई हिर्स व लालच से) माल जमा करता है और (फिर वह खुशी से) उसको बार-बार गिनता है और समझता है, कि उसका यह माल उसके पास हमेशा रहेगा: हरगिज़ नहीं रहेगा, बल्कि अल्लाह तआला उसको ऐसी आग में डालेगा जो हर चीज़ को तोड़-फोड़ कर रख देगी।”

📕 सूरह हुमजह: २-४

8. आख़िरत के बारे में

जन्नत और जहन्नम का एक-एक कतरा

रसलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : 

“अगर जन्नत का एक कतरा तुम्हारी इस दुनिया में तुम्हारे पास आ जाए, तो सारी दुनिया को मीठा कर दे और अगर जहन्नम का एक कतरा तुम्हारी दुनिया में आ जाए तो सारी दुनिया को तुम्हारे लिए यह कड़वा कर दे।”

📕 अबू दाऊद : ४१४८, अन अबिद (र.अ) 

9. तिब्बे नबवी से इलाज

जुओं का इलाज

हज़रत कअब बिन उजरा (र.अ)  बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह (ﷺ) मेरे पास तशरीफ़ लाए और उस वक्त मेरे सर से जुए गिर रही थीं तो आप (ﷺ) ने फ़रमाया :

“तुम को इन जुओं से तकलीफ़ है?

मैंने अर्ज़ किया: जी हां, तो आप (ﷺ) ने फ़रमाया : सर मुंड्वा दो।”

📕 बुखारी : ५७०३

10. नबी (ﷺ) की नसीहत

घर में दाख़िल होते वक्त सलाम करना

हज़रत अनस (र.अ)  फ़र्माते हैं कि मुझ से रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया: 

“ऐ बेटे! जब घर पर जाओ तो अपने अहल व अयाल को सलाम कर के दाखिल होना, इसलिए के तेरा सलाम करना तेरे और तेरे अहल व अयाल के हक में बरकत का बाइस होगा।”

📕 तिर्मिज़ी : २६९८

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