आत्महत्या तो ईश्वर के प्रति अविश्वास है...


आत्महत्या के बहुतसे अलग अलग कारण होते हे जैसे की आर्थिक संकट ,व्याज, प्रेम में असफलता....

👉 लेकिन आत्महत्या का मूल कारण है...जिंदगी के मकसद को भूला बैठना....
 
♨ *सर्जनहार ने हमें क्यों पैदा किया* ❓ 

💥अगर यह बात हमारी समज में आ जायें तो हमारी सारी समस्याएं आसान हो जाये 🌿

➡ *"जिसने मृत्यु और जीवन को पैदा किया, ताकि तुम्हारी परीक्षा करे कि तुम में कर्म की दृष्टि से कौन सबसे अच्छा है ? वह प्रभुत्वशाली, बड़ा क्षमाशील है।"*-
 (क़ुरआन 67:2)

 💥अब जब उसने हमें हमारी परीक्षा लेने यानी कि आजमाने के हेतु पैदा किया है तो वह हमें जरुर आजमाएगा भी...

*"हर जानदार को मौत का मजा चखना है, और हम अच्छी और बुरी परिस्थितियों में डालकर तुम सब की आजमाइश कर रहे है."* (कुरआन, सूरह अंबिया- 35)

कुरआन में हम सब का सर्जनहार कहेता है कि...

➡ *"और हम अवश्य ही कुछ भय से, और कुछ भूख से, और कुछ जान-माल और पैदावार की कमी से तुम्हारी परीक्षा लेंगे। और धैर्य से काम लेनेवालों को शुभ-सूचना दे दो*

*जो लोग उस समय, जबकि उनपर कोई मुसीबत आती है, कहते है, "निस्संदेह हम अल्लाह ही के है और हम उसी की ओर लौटने वाले है।*

*यही लोग है जिनपर उनके रब की विशेष कृपाएँ है और दयालुता भी; और यही लोग है जो सीधे मार्ग पर हैं*
(क़ुरआन 2:- 155 से157)

🏝️ सर्जनहार हमे धैर्य से काम लेने की हमें सीख देता हे और धीरज रखने वालो को खुशखबरी भी देता है...🍂🌿

🌹सर्जनहार हमें एक दिल को सुकून देने वाली बात करता है... ताकि हम सत्य मार्ग पर डटे रहे और जिंदगी में हम कभी हौसला न हारें...

*"हम किसी व्यक्ति पर उसकी समाई (क्षमता) से बढ़कर ज़िम्मेदारी का बोझ नहीं डालते "*
 (क़ुरआन 23:62)

जब सर्जनहार खुद कह रहा है कि वह हमारी ताकत से ज्यादा हमें नहीं आजमाएगा फिर हमे तकलीफों से डरने की जरूरत ही नहीं.....बस धैर्य से उस के बताये मार्गदर्शन के मुताबिक जीवन व्यतीत करे और तकलीफो का सामना हिम्मत से करें...क्योंकि हमारे सर्जनहार का यह वादा है कि यह मुसीबतें चंद दिनों के लिये है और दुख के दिन जल्द खतम होंगें, और वोह हमारें साथ दया का व्यवहार जरुर करेगा...

➡ *"कह दो कि ए मेरे बन्दों, जिन्होंने अपनी जानों पर ज्यादती की है, अल्लाह की दयालुता से निराश न हो जाओ."*(कुरआन, सूरह जुमर- 53) 

हमारा सर्जनहार इस परीक्षा के जरिये हमें आजमा कर देखना चाहता है कि कौन इन्सान एसै है जो अपनी मर्जी से उस के रास्ते पर धैर्य से चल कर मरने के बाद की जिंदगी में जन्नत पाना चाहते है...या अपनी बुरी ख्वाहिशों और इच्छाओं पर चल कर जहन्नम का 
मार्ग पसंद करते है...अब फैसला हमारे हाथ में है...

 👉 आत्महत्या तो उस सर्जनहार के प्रति अविश्वास हेै...जिसनें हम से वादा किया है कि वोह हम पर अपनी ताकत से ज्यादा बोझ नहि डालेगा...

✅ दुनियावालों से हार जानें से बेहतर है कि एक बार इस दुनिया बनाने वाले हमारे सर्जनहार के सामने गिड़गिड़ाकर दुआएं मांगे.....वोह हमें कभी नाउम्मीद नहि करेगा.

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