26. रमजान | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

26. रमजान | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

26. Ramzan | Sirf Paanch Minute ka Madarsa

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1. इस्लामी तारीख

गज़व-ए-उहुद

बद्र की शिकस्त से क़ुरैशे मक्का के हौसले तो पस्त हो गए थे, मगर उन में गम व गुस्से की आग भड़क रही थी, उस आग ने उनको एक दिन भी चैन से बैठने न दिया, एक साल तो उन्होंने किसी तरह गुज़ारा, मगर अगले ही साल सन ३ हिजरी में तीन हज़ार आदमियों का एक बड़ा लश्कर मक्का से रवाना हुआ और मदीना पहँच उहुद पहाड़ के पास अपना पड़ाव डाला।

रसूलुल्लाह (ﷺ) भी शव्वाल सन 3 हिजरी में जुमा की नमाज़ पढ़ कर एक हज़ार का लश्कर ले कर उहद पहाड़ की तरफ रवाना हुए, मगर ऐन वक्त पर मुनाफिकों ने धोका दिया और अब्दुल्लाह बिन उबइ तीन सौ आदमियों को लेकर वापस हो गया, अब सिर्फ सात सौ मुसलमान रह गए।

उहुद के मकाम पर लड़ाई शुरू हुई और दोनों जमातें एक-दूसरे पर हमला आवर हुई, इस जंग में मुसलमानों को शुरू में फ़तह हुई मगर एक गलती की वजह से इस लड़ाई में सत्तर सहाब-ए-किराम (र.अ)  को जामे शहादत नोश करना पड़ा और रसूलुल्लाह (ﷺ) का एक दांत भी इस लड़ाई में शहीद हो गया।”

2. हुजूर (ﷺ) का मुअजीजा

आप (ﷺ) की उंगलियों से पानी जारी होना

हज़रत जाबिर (र.अ)  फ़र्माते हैं :

सुलहे हुदैबिया के दिन सहाबा प्यासे हो गए, रसूलुल्लाह (ﷺ) के सामने एक पानी का प्याला रखा था, आप ने वुज़ू फर्माया, फिर (बचे हुए पानी) की तरफ लोग लपके, 

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने पूछा : क्या हुआ? 

उन्हों ने अर्ज़ किया : न हमारे पास पीने को पानी है और न वुज़ू करने को, बस यही पानी है जो आप (ﷺ) के सामने रखा है।

आप (ﷺ) ने अपना हाथ प्याले में रख दिया, पानी आपकी उंगलियों में से चश्मे की तरह उबलने लगा, हमने पिया और वुज़ू भी किया, 

उन से पूछा गया : कितने आदमी थे, फर्माया : पन्द्रह सौ थे और अगर एक लाख होते तब भी काफी हो जाता।

📕 बुखारी : ३५७६

3. एक फर्ज के बारे में

बीमार की नमाज़

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया : 

“नमाज़ खड़े हो कर अदा करो, अगर ताकत न हो तो बैठकर अदा करो, और अगर इस पर भी कुदरत न हो, तो पहलू के बल लेट कर अदा करो।”

📕 बुखारी : १११७, अन इमरान बिन हुसैन (र.अ) 

वजाहत: अगर कोई बीमार हो और खड़े होने पर कादिर न हो, तो रुकू व सजदा के साथ बैठ कर पढ़े अगर रुकू व सजदे पर भी कादिर न हो, तो इशारे से पढ़े और अगरं बैठ कर पढ़ने की ताकत न रखता हो, तो लेट कर पढ़े।

4. एक सुन्नत के बारे में

बीवी से मुलाकात के वक्त की दुआ

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : 

“जब कोई शख्स अपनी बीवी के पास (तन्हाई में) आए और यह दुआ–

❝ बिस्मिल्लाही अल्लाहुम्मा जन्निबनश-शैताना वा जन्नीबिश-शैताना मा रज़कताना ❞

तर्जुमा : अल्लाह के नाम से शुरू करता है, ऐ अल्लाह ! हमें शैतान से बचा और जो औलाद हमें दे उसकी भी शैतान से हिफाज़त फर्मा। जब यह दुआ पढ़ लेगा तो उस के बाद जो औलाद पैदा होगी शैतान उस को कभी नुक्सान नहीं पहुँचा सकता।”

📕 बुखारी : १४१.अन इब्ने अब्बास (र.अ)

5. एक अहेम अमल की फजीलत

मुसलमान की ज़रूरत पूरी करने की फ़ज़ीलत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : 

मुसलमान मुसलमान का भाई है, लिहाज़ा न उस पर ज़ुल्म करे और न उसको बेयार व मददगार छोड़ दे, जो शख्स अपने भाई की ज़रुरत (पूरी करने) में लगा रहे, अल्लाह तआला उसकी ज़रुरत (को पूरी करने में) लगा रहता हैं और जो शख्स किसी मुसलमान से एक परेशानी को दूर करेगा, अल्लाह तआला कयामत के दिन उस की परेशानी को दूर कर देगा और जो किसी मुसलमान के ऐब को छुपाएगा, तो अल्लाह तआला कयामत के दिन उस के ऐब को छुपाएगा।”

📕 अबू दाऊद : ४८९३

6. एक गुनाह के बारे में

नाप तौल में कमी करने का गुनाह

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है : 

बड़ी बरबादी है नाप तौल में कमी करने वालों के लिए के जब लोगों से (कोई चीज़) नाप कर लेते हैं, तो पूरा भर कर लेते हैं और जब लोगों को (कोई चीज़) पैमाने से नाप कर या वज़न कर के देते हैं तो (उस में) कमी कर देते हैं ।” 

📕 सूरह मुतफ्फिीन : १ ता २

7. दुनिया के बारे में

दुनिया की मुहब्बत

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है :

“यह लोग दुनिया से मुहब्बत रखते हैं और अपने आगे आने वाले एक भारी दिन को छोड़ बैठे हैं।” 

(यानी दुनिया की मुहब्बत ने ऐसा अंधा कर रखा है, के क़यामत के दिन की न तो कोई फिक्र है और न ही कोई तय्यारी है, हालांके दुनिया में आने का मकसद ही आखिरत के लिए तय्यारी करना है)।”

📕 सूरह अल-इंसान : २७

8. आख़िरत के बारे में

काफिर व गुनहगार को कब्र में अज़ाब

सूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : 

अल्लाह तआला (गुनहगार और काफिर पर कब्र में) सत्तर अज़दहे मुसल्लत कर देता है, अगर उनमें से एक भी अज़दहा ज़मीन पर कुंकार मार दे, तो कयामत तक ज़मीन कुछ भी नहीं उगाएगी, (कब्र में ) कयामत के दिन तक वह अज़दहे उसे नोचते और डंक मारते रहेंगे।”

📕 तिर्मिज़ी : २४६०, अन अबी सईद (र.अ) 

9. कुरआन की नसीहत

गुर्दे की बीमारियों का इलाज

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : 

“पहलू के दर्द का सबब गुर्दे की नस है, जब वह हरकत करती है तो इन्सान को तकलीफ होती है और उसका इलाज गर्म पानी और शहद से करो।”

📕 मुस्तदरक हाकिम : ८२३७, अन आयशा (र.अ) 

वजाहत: गुर्दे में जब पथरी वगैरह हो जाती है तो कूल्हों में दर्द होता है बल्कि अकसर उसी दर्द ही की वजह से बीमारी का पता चलता है, उस का इलाज आप (ﷺ) ने यह बतलाया के गरम पानी और शहद मिला कर पियो।

10. नबी (ﷺ) की नसीहत

अल्लाह तआला रात के अखीर हिस्से में बन्दे से बहुत ज़्यादा करीब होता हैं

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया

“अल्लाह तआला रात के अखीर हिस्से में बन्दे से बहुत ज़्यादा करीब होता हैं, अगर तुमसे हो सके तो उस वक्त अल्लाह तआला का ज़िक्र किया करो।”

📕 मुस्तदरक हाकिम : ११६२, अन अम्र बिन अब्बास (र.अ)

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