लङकियों पर पाबंदियां लगाने की क्या वजह है ?

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लङकियों पर पाबंदियां लगाने की क्या वजह है ?

एक बार एक लङकी ने मौलाना साहब से कहा के एक बात पुछूँ?

मौलाना साहब ने फरमाया; बोलो बैटी क्या बात है?

लङकी ने कहा हमारे समाज में लङकों को हर तरह की आज़ादी होती है!!
वोह कुछ भी करें, कहीं भी जाएं, इस पर कोई ख़ास रोक टोक नहीं होती!

इस के बरअक्स लङकियों को बात बात पर रोका जाता है।
यह मत करो! यहाँ मत जाओ! घर जल्दी आजाओ!

यह सुनकर मौलाना साहब मुस्कुराए ओर फरमाया!...

बेटी आप ने कभी लोहे की दुकान के बाहर लोहे के गोदाम में लोहे की चीज़ें पङी देखीं हैं ? 

यह गोदाम में सर्दी, गर्मी, बरसात, रात, दिन इसी तरह पङी रहती हैं.. इसके बावजूद उनका कुछ नहीं बिगङता ओर उनकी क़ीमत पर भी कोई अस़र नहीं पङता۰٠😇😇


लङकों की कुछ इस तरह की ह़ैसियत है समाज में!👍👍

अब आप चलो एक सुनार की दुकान में। एक बङी तिजोरी, उस में एक छोटी तिजोरी, उस में रखी छोटी सुंदर सी डिब्बी में रेशम पर नज़ाकत से रखा चमकता हीरा۔۔☺☺

क्योंकि जोहरी जानता है कि अगर हीरे में ज़रा भी खराश आगई तो उसकी कोई क़ीमत नहीं रहेगी۔۔😑😑

इस्लाम में बेटियों की अहमियत भी कुछ इसी तरह की है🌹🌹🌹

पूरे घर को रोशन करती झिलमिलाते हीरे की तरह ज़रा सी ख़राश से उसकी ओर उसके घर वालों के पास कुछ नहीं बचता।  ...😓😓

बस यही फर्क़ है लङकियों और लङकों में😊

पूरी मजलिस में ख़ामोशी छा गई उस बैटी के साथ पूरी मजलिस की आँखों में छाई नमी साफ साफ बता रही थी लोहे और हीरे में फर्क़٠٠ 😇😇😇

आप से इल्तेजा है कि यह पैग़ाम अपनी बहनों को ज़रूर सुनाएं , दिखाएं और पढ़ाएं👍

👍👍मेरे अज़ीज़ो ! हमेशा की तरह वोही एक आखरी बात कहता चलूं के अगर कभी कोई क़ौल, वाक़िआ, कहानी या तहरीर वगैरह अच्छी लगा करे तो पढ़ने के बाद और थोङी तकलीफ उठाकर अपने दोस्तों को भी शेयर करें , यक़ीन करें के इसमें आपका मुश्किल से एक लम्हा लगेगा लेकिन हो सकता है इस एक लम्हे की उठाई हुई तकलीफ से आपकी शेयर की हुई तहरीर हज़ारों लोगों के लिए सबक़ आमोज़ स़ाबित हो!....

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